
बढ़ती महंगाई ने जहां आम आदमी को त्रस्त कर रखा है, वहीं इसे काबू में न ला पाने की चिंता की लकीरें अब केंद्र सरकार के माथे पर भी उभरने लगी हैं. यह बात केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक रिपोर्ट से पता चलती है.
वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक आर्थिक रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल स्तर पर जिंसों की बढ़ती कीमतों, विशेष रूप से कच्चे तेल की महंगाई और लॉजिस्टिक की बढ़ती लागत महंगाई के और बढ़ने का जोखिम पैदा कर रही है.
हालांकि रिपोर्ट में कीमतों पर जताई गई इस चिंता के साथ ही मानसून बेहतर रहने और अर्थव्यवस्था में दोबारा तेजी आने से जल्द ही महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद भी जताई गई है.
मंत्रालय की रिपोर्ट में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर कुछ खास नहीं कहा गया है, लेकिन इसमें शहरी क्षेत्रों में खाने-पीने की चीजों की तेजी से बढ़ती महंगाई (खाद्य मुद्रास्फीति) पर चिंता जताई गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है “कोरोना की दूसरी लहर के कारण स्थानीय स्तर पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते वस्तुओं की आपूर्ति में आई बाधा से मई में कीमतों के दबाव (महंगाई) में बढ़ोतरी हुई है.
रिपोर्ट में मानसून की उत्साहजनक प्रगति के साथ दालों और खाद्य तेलों की आपूर्ति में सरकार के हस्तक्षेप और अनलॉकिंग की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ने से स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई गई है.
वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार की इस गई रिपोर्ट में टीकाकरण में तेजी आने जैसी चीजों का हवाला देते हुए इससे आर्थिक मोर्चे पर भी हालात सुधरने की उम्मीद जताई गई है.
मंत्रालय इस बात को लेकर भी आशावान है कि सरकार की हालिया घोषणाओं से मांग (खपत) के स्तर में भी सुधार आएगा.
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