
दालों की लगातार बढ़ती कीमतों को काबू में लाने के लिए केंद्र सरकार ने दालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के तहत स्टॉक लिमिट लगा दी है.
इसका आदेश 2 जुलाई की रात जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और यह 31 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी.
आदेश के मुताबिक मूंग दाल को छोड़कर सभी दालों के लिए स्टॉक लिमिट तय की गई है. थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, मिल मालिकों और आयातकों के लिए अलग-अलग स्टॉक लिमिट तय की गई है.
थोक व्यापारी केवल 200 मीट्रिक टन दालों का स्टॉक कर सकते हैं. इसमें भी किसी एक प्रकार की दाल का स्टॉक 100 मीट्रिक टन से अधिक नहीं होना चाहिए.
खुदरा विक्रेता अब केवल 5 मीट्रिक टन तक स्टॉक कर सकते हैं और मिल संचालकों के लिए स्टॉक की सीमा उत्पादन के अंतिम तीन महीने का स्टॉक या मिल की वार्षिक स्थापित क्षमता का 25 फीसदी में से जो अधिक हो, वह लागू होगी.
आयातकों के लिए स्टॉक सीमा 15 मई, 2021 से पहले रखे गए या आयातित स्टॉक के लिए थोक विक्रेताओं के बराबर यानी 200 मीट्रिक टन होगी, जबकि 15 मई के बाद आयातित दालों के लिए थोक विक्रेताओं पर लागू स्टॉक की लिमिट सीमा शुल्क की तारीख से 45 दिनों के बाद लागू होगी.
स्टॉक लिमिट लगाने के साथ ही केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द और मूंग को प्रतिबंधित श्रेणी से हटा दिया है और अक्टूबर 2021 तक मुक्त आयात की अनुमति दी है.
स्टॉक खत्म करने में लगने वाले समय को भी 10-11 दिन से घटाकर 6-9 दिन कर दिया गया है. इसके अलावा दालों के आयात के लिए म्यांमार, मलावी और मोजाम्बिक के साथ पांच साल का करार किया गया है.
केंद्र ने दालों की कीमतों को और कम करने के लिए मिलिंग, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकेजिंग और सेवा शुल्क की लागत वहन करके राज्य सरकारों को 2020-21 में दालों का बफर स्टॉक भी जारी किया है।
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