बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा कष्ट में हैं। सूखी लकड़ी है नहीं, राशन भी आधा भींगा-आधा सूखा। रसोई में कमर भर पानी, इसलिए चूल्हा-चौका भी ठंडा। पिछले एक सप्ताह से ऐसा ही चल रहा। सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक के मेनू में चूड़ा-गुड़ है।
बागमती रौद्र रूप से बसघट्टा पंचायत में अंदामा गांव सबसे ज्यादा तबाह है। लाल बाबू प्रसाद बताते हैं, 80 परिवार वाले गांव की आबादी 412 है। गांववाले खेती और पशुपालन के साथ बढ़ई का काम करते हैं। छोटे बच्चों के लिए खतरा है, उन्हेंं संभालना भी मुश्किल। ऐसे में क्या करते ट्रॉली पर चढ़ा दिए। इससे अधिक सुरक्षित जगह और कहीं नहीं दिखी। बच्चों को दिनभर घर की छतों पर घेरकर रखते हैं, ताकि नीचे पानी में न घूमें।
लोग गुहार लगाते हैं कि प्रशासन गांव को एक नाव मुहैया करा दे तो बाजार जाना आसान हो जाएगा। गांव से तीन किमी दूर बसघट्टा नया टोला में सामुदायिक रसोई चलती है, वहां कोई कैसे पहुंचेगा।

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