एक्वापोनिक्स खेती संग मछली पालन कर यह इंजीनियर कमा रहे तगड़ा मुनाफा, जानिए कैसे

मिट्टी उपयुक्‍त न होने या उर्वरा शक्ति कम होने जैसी समस्‍याओं से हमारे देश में किसान अकसर परेशान रहते हैं. इसीके चलते उन्‍हें कई बार अपना खेत परती पर छोड़ना पड़ता है यानी खेत में फसल नहीं बोई जाती, इस समस्‍या का एक समाधान बन कर एक्वापोनिक्स पद्यति उभर रही है. हालांकि इसकी लागत काफी अधिक होने और कई तरह की जटिलताओं के चलते यह अभी हमारे देश में उतनी प्रचलित नहीं हो पाई है, पर पड़ोसी देश चीन समेत कई एशियाई देशों में यह काफी लोकप्रिय है. इस तकनीक में 95 फीसदी तक पानी की बचत होती है. इसके अलावा इसमें पूरी तरह से जैविक खेती होती है. इन्‍हीं फायदों के चलते धीरे-धीरे यह हमारे देश में भी अपनाई जाने लगी है. महाराष्ट्र के एक इंजीनियर ने एक्वापोनिक्स के जरिये बिजनेस का एक सफल मॉडल स्थापित किया है. एक्वापोनिक्स में एक्वा मतलब पानी और पोनिक्स मतलब होता है. भारत में सबसे बड़ा एक्वापोनिक्स फार्म चलाने वाले इंजीनियर मयंक गुप्ता ने कई देशों की अपनी यात्रा के दौरान यह तकनीक सीखी है और अब वह महाराष्ट्र के किसानों छोटे स्तर पर एक्वापोनिक्स खेती करना सिखा रहे हैं. इसके अलावा अमेरिका से नौकरी छोड़ कर भारत आए सॉफ्टवेयर इंजीनियर जेगन विंसेंट ने तमिलनाडु के चेन्नई से 76 किमी दूर चेंगलपेट में भी इसका अच्छा उदहारण पेश किया है. लिहाज़ा यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें खेती मिट्टी में नहीं, बल्कि पानी की सतह पर की जाती है. सिर्फ एक फ्लोटिंग कार्ड बोर्ड की सहारा होता है. जिसमें सब्जियां उगती है. इस तकनीक में सब्जी में कीटनाशक, या कोई खाद देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है. पौधे खुद पानी से अपने जरूरत के हिसाब से भोजन ले लेता है. इसमें पौधे लगाने के लिए पहले छोटा ट्रे में पौधा तैयार करना पड़ता है इसके बाद इसे तैरते हुए बोर्ड पर रखा जाता है. एक्वापोनिक्स तकनीक में मछली और सब्जियों की इंटीग्रेटेड तरीके से खेती की जाती है. खेती के लिए खाद की व्यवस्था मछलियों के वेस्ट से हो जाता है. इस तकनीक में पॉलीहाउस के भीतर खेती की जाती है. इसके लिए दो बड़े गोलाकार टैंक बनाए जाते हैं. प्रत्येक टैंक का पानी बाहर निकलता रहता है और एक दूसरे टैंक में जाता है जहां पर शुद्ध पानी बाहर पाइप मे चला जाता है. जो मछलियों का पानी होता है वो पाइप के जरिये दूसरे टैंक में जाता है जहां पर बोर्ड के उपर सब्जियों के बिचड़े रखे गये थे. इस तरह से पानी जब वहां जाती है सब्जियों के जड़ उस पानी से जरूरी पोषण ले लेते हैं , इसके बाद पानी फिर से मछली वाले टैंक में आ जाता है.

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