
सरकारी खरीद केंद्रों पर अच्छे अनाज को भी अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा रिजेक्ट किए जाने की समस्या से किसानों को जल्द ही निजात मिल सकती है.
गुणवत्ता की जांच के नाम पर किसानों के शोषण पर लगाम लगाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) कृषि-स्टार्टअप कंपनी के साथ मिलकर मशीन से खाद्यान्न की जांच की प्रणाली विकसित करने के लिए काम कर रहा है.
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक आने वाले समय में इन जांच उपकरणों को सरकार द्वारा संचालित मंडियों में लगाया जाएगा.
अधिकारी ने कहा कि तकनीक और उपकरणों पर आधारित गुणवत्ता मूल्यांकन व्यवस्था अपनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि इस व्यवस्था को लागू करने में अभी कुछ वक्त लगेगा क्योंकि यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है.
उन्होंने कहा कि एफसीआई एक सरल और आसान परीक्षण उपकरण विकसित करने के लिए भारतीय कृषि-स्टार्टअप कंपनी के साथ काम कर रहा है, जिसे सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित हजारों मंडियों में तैनात किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि गेहूं खरीद के दौरान पंजाब में दो और हरियाणा में दो मंडियों में कुछ उपकरणों का पायलट प्रोजेक्ट के तहत परीक्षण किया गया था.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सॉफ्टवेयर, खामियों की पहचान करने में सक्षम है, लेकिन अब तक स्वीकार्य स्तर तक सटीक नहीं हो पाया है.
बता दें कि खाद्यान्नों की खरीद की प्रक्रिया के दौरान, किसानों द्वारा मंडियों में लाए गए अनाज की गुणवत्ता की जांच भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा तय की गई पद्धति से करने का नियम है, पर मंडी के कर्मचारी इसमें अपनी मनमर्जी चला कर किसानों से वसूली की फिराक में रहते हैं.
इसकी वजह यह है कि सरकारी अनाज मंडियों में अनाज में नमी की मात्रा के परीक्षण को छोड़कर, अन्य सभी मापदंडों का परीक्षण मैनुअल यानी कर्मचारियों द्वारा ही किया जाता है.
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