महज 70 दिन में तैयार हो जाती है इस जीरे की फसल, कीट का भी खतरा नहीं

मसाले की खेती की बात की जाए तो यह ज्‍यादातर दक्षिण भारत में ही होती है, पर जीरा एक ऐसा मसाला है जो मुख्‍य रूप से उत्‍तर भारत में उगाया जाता है . हमारे देश में ज्‍यादातर किसान अभी जीरे की पुरानी किस्म जीसी-4 की खेती करते आ रहे हैं. इसमें बुवाई के 70 दिनों के बाद फूल आते हैं और पकने में 130 से 140 दिन का समय लगता है. इसके अलावा इस जीरे की किस्‍म में कई तरह के रोग और कीट लगने से फसल बर्बाद होने का भी खतरा बना रहता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के जोधपुर में स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने सीजेडसी-94 नाम की नई किस्म तैयार की है. जीरे की यह नई किस्म आम बीमारियों और कीट से सुरक्षित है. सबसे अच्छी बात है कि यह किस्म 40 दिनों के बाद फूल देने लगती है और 90 से 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार भी जाती है. इस प्रजाति को विकसित करने में कृषि वैज्ञानिकों को कुल 3 साल का वक्त लगा है. जीरे की पुरानी किस्म में फरवरी के आखिर में माहू कीट यानी एफिड लगने का खतरा रहता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक सीजेडसी-94 जीरे की फसल माहू कीट से सुरक्षित है. नई किस्म में फरवरी से अंत तक फल लगना शुरू हो जाता है इसलिए माहू कीट लगने की समस्या नहीं आती. बता दें कि हमारे देश में जीरा मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में उगाया जाता है. गुजरात के ही ऊंझा में इसकी सबसे बड़ी मंडी है. अपने देश के ज्यादातर किसान दुनिया का करीब 70 फीसदी जीरा अकेले भारत में पैदा होता है. भारत में भी राजस्थान का पहला और गुजरात का दूसरा नंबर है.

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