
बैंकों में ट्रेजरी, करेंसी चेस्ट समेत संवेदनशील काम संभालने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को अब हर साल 10 दिन की 'सरप्राइज लीव' पर भेजा जाएगा.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सभी बैंकों को इसके लिए आदेश जारी कर दिया है. आरबीआई ने बैंकों के जोखिप प्रबंधन यानी रिस्क मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया है.
सरप्राइज लीव का यह नियम शेड्यूल कमर्शियल बैंकों के साथ ही ग्रामीण विकास बैंक और सहकारी बैंक समेत सभी बैंकों पर लागू होगा.
अचानक दिए गए इस अवकाश के दौरान कर्मचारियों को बैंक के आंतरिक व कॉरपोरेट ई-मेल को छोड़कर भौतिक रूप से या ऑनलाइन किसी भी तरह से काम की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी.
इस अनिवार्य छुट्टी के दायरे में वे कर्मचारी आएंगे, बैंकों के जो कर्मचारी या अधिकारी कोषागार (ट्रेजरी) ऑपरेशन, करेंसी चेस्ट, रिस्क मॉडलिंग, मॉडल वैलिडेशन जैसे काम करते हैं, क्योंकि उनका काम संवेदनशील माना जाता है.
रिजर्व बैंक जल्द ही संवेदनशील पदों को लेकर एक सूची भी जारी करेगा, जिनपर यह नियम लागू होगा. नियम के तहत इन किर्मियों को बिना पूर्व सूचना के अचानक 10 दिन की छुट्टी पर भेजा जाएगा.
रिजर्व बैंक ने इससे पहले पंजाब नेशनल बैंक में नीरव मोदी का घोटाला सामने आने के बाद अप्रैल 2015 में भी इस तरह का एक सर्कुलर जारी किया था, पर उसमें अवकाश के लिए दिनों की संख्या स्पष्ट नहीं की थी.
नए आदेश में आरबीआई ने स्पष्ट रूप से 10 कार्य दिवस के अवकाश की बात कही है. इस तरह नए आदेश के से 23 अप्रैल 2015 का पुराना सर्कुलर स्वत: निरस्त निरस्त हो गया है.
आरबीआई ने बैंकों से संवेदनशील पदों की सूची तैयार करने और समय-समय पर इसकी समीक्षा करते रहने को कहा है. बैंकों से छह माह के भीतर रिजर्व बैंक के इस निर्देश का पालन करने को कहा गया है.
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