कोरोना की मार से जहां उद्योग और कारोबार जगत परेशान है, वहीं कृषि क्षेत्र पर इसका ज्यादा बुरा असर नहीं पड़ा है। इस बात की पुष्टि साल की पहली छमाही में ट्रैक्टर की रिकॉर्ड बिक्री से होती है.
इस साल सात महीने में ही ट्रैक्टर की बिक्री ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. कभी साल भर में जितने ट्रैक्टर बिकते थे उतने बिक चुके हैं.
ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन (TMA) के आकंड़ों के मुताबिक जुलाई तक 5,99,993 ट्रैक्टर की बिक्री हो चुकी है. यह पिछले साल से करीब दो लाख अधिक है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के बावजूद देश के कृषि क्षेत्र में ग्रोथ जारी रहना इसका सबसे बड़ा कारण है.
इससे पता चलता है कि कृषि से जुड़े लोगों में लोन चुकाने की क्षमता है. इसलिए ट्रैक्टर की खरीद में इतनी वृद्धि हुई है.
इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन एमजे खान का कहना है कि “कोरोना काल में शहरों से लोग गांवों में पैसा लेकर गए हैं. शहर से गांव गए लोगों में से कम से कम 25 फीसदी ने खेती में निवेश किया है, जिसमें खेती के लिए ट्रैक्टर की खरीद भी शामिल है.

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