मंडियों में खुले बर्बाद नहीं होगा अनाज जूट उद्योग मुहैया कराएगा 34 लाख गांठ बोरियां

बोरियों के अभाव में देशभर की अनाज मंडियों में किसानों का लाखों टन अनाज खुले में पड़ा रह कर खराब हो जाता है. इसे देखते हुए आगामी सीजन में बोरियों के इंतजाम की कवायद अभी से शुरू हो गई है. खाद्यान्न उत्पादक राज्यों और अनाज खरीद एजेंसियों ने कपड़ा मंत्रालय के तहत जूट पर स्थायी सलाहकार समिति (SAC) की बैठक में पश्चिम बंगाल की जूट मिलों द्वारा जूट की बोरियों की कमी के मुद्दे पर चर्चा हुई. केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के तहत जूट की स्थायी सलाहकार समिति की बुधवार को बैठक हुई जिसमें वर्ष 2021-22 में जूट की बोरियों में वस्तुओं की पैकेजिंग के लिए आपत्तियों की जांच, विचार और सिफारिश की गई. इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राघव गुप्ता ने बताया कि हमने सरकार को इस बात का भरोसा दिलाया है कि आगामी फसल के कजए जूट मिलें सरकार को 34 लाख गांठ बोरी मुहैया कराएंगी. बता दें कि जूट पैकेजिंग सामग्री (जेपीएम) अधिनियम कहता है कि 100 प्रतिशत खाद्यान्न की पैकेजिंग जूट की बोरियों में होनी चाहिए. हालांकि जूट की बोरियों की कमी को देखते हुए सरकार ने 2021-22 के रबी सीजन के लिए उच्च घनत्व वाले पॉलीथीन/पॉलीप्रोपाइलीन (एचडीपीई/पीपी) बैग के 7.7 लाख गांठ के उपयोग के लिए पहले ही छूट दे दी है.

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