दिल्‍ली में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने अब इस राज्‍य में चली बड़ी सियासी चाल !


दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद जहां दिल्‍ली की चुनी हुई सरकार पर संकट खड़ा हो गया है, वहीं भाजपा ने कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश में सीएम सुक्‍खू की कुर्सी हिलाने के लिए एक और बड़ी सियासी बिसात बिछा दी है. 


एक अजीबोगरीब राजनीतिक दांव के तहत हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्यता से तीन निर्दलीय विधायकों नेइस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर उपचुनाव लड़ने का फैसला लिया है. इन तीन निर्दलीय विधायकों में नालागढ़ से कृष्ण लाल ठाकुर, देहरा से होशियार सिंह और हमीरपुर से आशीष शर्मा शामिल हैं. 


राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद तीनों निर्दलीय विधायक राजभवन से वापस रवाना हो गए हैं. विधायक की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले होशियार सिंह ने कहा है कि तीनों निर्दलीय सदस्य अब भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर उपचुनाव लड़ेंगे.


इस्तीफे के बाद निर्दलीय विधायक ने कहा कि हमने स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. लीगल कार्यवाही को हमने आज पूरा किया. उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ूंगा. हम बहुत भारी मतों से जीतेंगे. नौ के नौ सीटें जीतेंगे. 


तीनों निर्दलीय विधायकों ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय पहुंचकर सचिव यशपाल शर्मा को अपना इस्तीफा सौंपा है.  इन तीनों निर्दलीय विधायकों का इस्तीफा मंजूर होने के बाद तीन और नई सीट खाली हो जाएगी. 


हिमाचल प्रदेश में पहले ही छह विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव घोषित हो चुका है. अब जल्द ही इन तीन विधानसभा क्षेत्र में भी साथ ही साथ उपचुनाव की घोषणा होने की संभावना बन गई है. ऐसे में माना जा रहा है कि ये विधायक अगर बीजेपी के टिकट पर चुुनाव जीतकर फिर से विधायक बनते हैं, तो राज्‍य की कांग्रेस सरकार गिर सकती है.


कांग्रेस के सभी छह बागी नेता पहले ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात कर बीजेपी के पाले में जाने का स्‍पष्‍ट संकेत दे चुके हैं. इस मुलाकात के दौरान धर्मशाला से सुधीर शर्मा, लाहौल स्पीति से रवि ठाकुर, सुजानपुर से राजिंदर राणा, बड़सर से इंद्र दत्त लखनपाल, गगरेट से चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से देवेंद्र सिंह भुट्टो मौजूद थे. 


इस बैठक में भाजपा में शामिल होने पर चर्चा हुई है. खास बात यह है कि मुलाकात के दौरान हिमाचल बीजेपी के अध्यक्ष और प्रदेश की राजनीति में पावर ट्रेडर की पहचान रखने वाले डॉ. राजीव बिंदल भी मौजूद थे.


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