झारखंड के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। यहां के भोगता और पुरान समुदाय की ओर से वर्षों से की जा रही मांग अब पूरी होगी।
राज्यसभा में सोमवार को जनजातीय कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड राज्य से संबंधित संविधान अनुसूचित जातियां और अनुसुचित जनजातियां आदेश संसोधन विधेयक 2022 पेश किया।
बिल में कहा गया है कि अनुसूचित जनजातियों की सूची में क्रम संख्या 16 पर भोगता, देश्वारी, गंझू, दौतलबंदी (द्वालबंदी), पटबंदी, राउत, माझिया, खैरी (खेरी) को खरवार के पर्याय के रूप में प्रविष्टि के तौर पर शामिल करना है।
इसी तरह अनुसूचित जनजातियों की सूची में क्रम संख्या 24 पर मुंडा के पर्याय के रूप में तमरिया को शामिल करना है।
राज्यसभा में इस बिल के पास हो जाने के बाद झारखंड के भोगता जाति की वर्षों से लंबित मांग पूरी हो जायेगी।
बिल में अनुसूचित जातियों की सूची में क्रम संख्या 3 पर सूचीबद्ध भोगता को विलोपित करने की बात भी कही गयी है।
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